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जानिए क्या है श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह का विवाद ? औरंगज़ेब ने किया था मंदिर को ध्वस्त

पूरी दुनिया जानती है, हिन्दू आस्था और विश्वास हैं, गीता कहती हैं, महाभारत दोहराती हैं कि भगवान विष्णु ने श्री कृष्ण के रूप में जन्म मथुरा में रे राजा कंस के करावास में लिया था।

हर वर्ष, हर रोज हजारों – लाखों श्री कृष्ण भक्त वहां दर्शन के लिए आते हैं । वह देखते हैं की मंदिर से लगी एक मस्जिद भी उन्हें दिखाई देती हैं जिसे शाही ईदगाह मस्जिद के नाम से जाना जाता है । यह मस्जिद ही विवाद का कारण है।

हाल ही में मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ा मामला कोर्ट की शरण में पहुंच गया है। श्री कृष्ण विराजमान की तरफ से यह याचिका सिविल कोर्ट में लगाई गई हैं। जिसके बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में हैं।

श्रीकृष्ण विराजमान का कहना है कि 1969 में कृष्ण सेवा संघ और शाही ईदगाह कमेटी के बीच हुए 10 बिंदुओं वाले समझौतों को रद्द किया जाए और 13.37 एकड़ भूमि श्री कृष्ण विराजमान को सौंपी जाए।

क्या है 1969 का समझौता

अंग्रेजो के समय से ही यहां पर विवाद चल रहा था, जो 136 साल बाद इलाहाबाद कोर्ट द्वारा दिए फैसले के मुताबिक इस जमीन का अधिकार कोर्ट ने वाराणसी के राजा को सौंप दिए थे।

इसके बाद 1968 में अगस्त महीने में जन्मस्थल सेवा संघ और शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी के बीच समझौता हुआ जो भी ढाई रुपए के स्टांप पर।

वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु जैन का कहना है कि वर्ष 1618 में राजा वीर सिंह बुंदेला ने इस मंदिर का चौथी बार निर्माण करवाया था लेकिन 1670 में मुगल बादशाह औरंगजेब ने इसे तोड़ दिया है। तोड़ने का को फरमान भी जरिए किया था।

इतिहासकारों का दावा है कि जिस जगह पर शाही ईदगाह मस्जिद है वो वहीं जगह हैं जहां भगवान श्री कृष्ण ( केशव राय मंदिर) का जन्म राजा कंस की काल कोठरी में हुआ था। इसी जगह स्थित मंदिर को तोड मस्जिद बनाई थी। खास बात यह भी हैं कि मस्जिद हिंदू मंदिरों की दीवार पर खड़ी हैं वह साफ – साफ दिखाई देता हैं।

आपको बता दे कि औरंगज़ेब से पहले भी लोदी के शासनकाल में सिकन्दर लोदी के समय तीसरी बार मंदिर में हमला हुआ था

Written by Devraj Dangi

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