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बाबरी ढांचा विध्वंश पर कोर्ट का फैसला, भारत के आंतरिक मामले पर पाक की गीदड़ भभकी

आज सीबीआई की विशेष अदालत ने बाबरी ढांचा विध्वंश मामले में एक फैसला सुनाया हैं, जिसमें सभी 32 अभियुक्तों को बरी कर दिया है । बरी हुए लोगों में बीजेपी के दिग्गज नेता पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह भी शामिल हैं।

कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि यह घटना पुर्वनियोजित नहीं थी और इन नेताओ ने मस्जिद को बचाने का प्रयास किया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि सीबीआई ने इनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं दे पाई।

भारत के इस आंतरिक मामले में पाकिस्तान का भी बयान आया है। पाकिस्तान अल्पसंख्यकों कि पैरवी करने लगा जबकि पाकिस्तान में हिंदू और सभी अल्पसंख्यकों के साथ क्या हो रहा है यह पूरी दुनिया जानती है।

कोर्ट के इस फैसले पर पाकिस्तान ने कहा है कि “अयोध्या में ऐतिहासिक मस्जिद गिराने के लिए जिम्मेदार लोगों को बरी करना शर्मनाक है और पाकिस्तान इसकी निंदा करता है।” लेकिन पाकिस्तान यह भूल गया कि यह भारत का अपना आंतरिक मामला हैं।

आतंकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “जिस पूर्वनियोजित रथ यात्रा और बीजेपी, विहिप और संघ परिवार के नेताओं के द्वारा भीड़ को उकसाने की वजह से मस्जिद का ढांचा गिराया गया, जिस आपराधिक कृत्य का टीवी पर लाइव प्रसारण हुआ, उस पर फैसला आने में तीन दशक लग गए। ये दुनिया को साबित करता है कि हिंदुत्ववाद से प्रभावित भारतीय न्यायपालिका एक बार फिर न्याय देने में असफल रही।”

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा, “बाबरी मस्जिद के ढांचा गिराए जाने की वजह से बीजेपी की अगुवाई में सांप्रदायिक हिंसा भड़की जिससे हजारों जानें गईं। अगर दुनिया के कथित सबसे बड़े लोकतंत्र में न्याय की जरा भी छाया होती तो आपराधिक कृत्य के बारे में सार्वजनिक रूप से शेखी बघारने वाले लोगों को बरी नहीं किया गया होता।”

पाक विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ-बीजेपी का शासन और संघ परिवार भारत में मस्जिदों के ढहाने और तोड़फोड़ की घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं। वे ऐसा नियोजित तरीके से कर रहे हैं जैसा गुजरात और दिल्ली दंगे में भी हुआ।”

भारत से कुछ कहने से पहले पाकिस्तान को अपनी अंदर झकना चाहिए। अपने अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने में नाकाम पाकिस्तान ने भारत को नसीहत भी दे डाली। पाकिस्तान ने भारत सरकार से अल्पसंख्यकों, खासकर मुस्लिमों और उनके पूजास्थलों को संरक्षण और सुरक्षा देने की मांग की जिन पर हिंदू अपना दावा पेश कर रहे हैं।

आपको बता दे कि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या स्थित विवादित बाबरी ढांचा को ध्वस्त कर दिया था। जिसमें बीजेपी, संघ, वीएचपी के कई बड़े नेताओं को आरोपी बनाया गया था।

Written by Devraj Dangi

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