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बाबरी विध्वंस मामले में CBI कोर्ट का फैसला, आडवाणी, उमा, जोशी समेत सभी 32 आरोपी बरी

बहुप्रतीक्षित अयोध्या में बाबरी ढांचा गिराने के मामले में आज सीबीआई की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए सभी 32 आरोपियों को रिहा कर दिया। इन आरोपियों के खिलाफ सीबीआई को मजबूत साक्ष्य नहीं जुटा पाई। इस मामले से जुड़े कई लोगो की तो मौत भी हो चुकी।

आपको बता की 6 दिसंबर 1992 को बाबरी ढांचा को रामभक्तो ने उग्र श्रद्धालुओं ने विध्वंस किया था। जिसके 29 साल बाद आज सीबीआई की विशेष अदालत ने उन सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। जिसमें पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती, पूर्व सीएम कल्याण सिंह समेत कई लोग इस मामले में आरोपी थे।

आज अपने फैसले में सीबीआई के विशेष जज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि “यह घटना पूर्व नियोजित नहीं थी।” ढांचा गिराने के लिए कोई प्री -प्लानिंग के तहत वहां भीड़ इकट्ठी नहीं हुई थी। यह घटना अचानक से हुई थी। फैसले में कहा गया कि मुरली मनोहर जोशी और अडवाणी ने भीड़ को रोकने की कोशिश की थी। दो हजार पन्नों का फैसला पढ़ते हुए जज ने इन सभी आरोपियों को बरी कर दिया। यानी कोर्ट ने बीजेपी के सीनियर नेताओं को दोषी नहीं माना।

सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश एस.के.यादव ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना पूर्व नियोजित नहीं थी। यह एक आकस्मिक घटना थी। उन्होंने कहा कि “आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता सुबूत नहीं मिले, बल्कि आरोपियों ने उन्मादी भीड़ को रोकने की कोशिश की थी।”

सीबीआई की विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश एस के यादव ने 16 सितंबर को इस मामले के सभी 32 आरोपियों को फैसले के दिन अदालत में मौजूद रहने को कहा था। हालांकि वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, राम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास और सतीश प्रधान अलग—अलग कारणों से न्यायालय में हाजिर नहीं हो सके। यह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े।

आपको बता दे कि कल्याण सिंह बाबरी मस्जिद ढहाये जाने के वक्त उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय भी इस मामले के आरोपियों में शामिल थे। मामले के कुल 49 अभियुक्त थे, जिनमें से 17 अभियुक्तों की मृत्यु हो चुकी है।

पूर्व सीएम कल्याण सिंह ने गत 13 जुलाई को सीबीआई अदालत में बयान दर्ज कराते हुए कहा था कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सियासी बदले की भावना से प्रेरित होकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। उन्होंने दावा किया था कि उनकी सरकार ने अयोध्या में मस्जिद की त्रिस्तरीय सुरक्षा सुनिश्चित की थी। इस मामले में लालकुष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, महंत नृत्य गोपाल दास, डा.राम विलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, सतीश प्रधान, पवन कुमार पांडेय, लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दूबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेश त्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडेय, अमर नाथ गोयल, जयभान सिंह पवैया, साक्षी महाराज, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धमेंद्र देव, सुधीर कुमार कक्कड़ और धर्मेंद्र सिंह गुर्जर आरोपी थे। अब यह सब बरी हो गए हैं।

Written by Devraj Dangi

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