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मथुरा: “शाही मस्जिद को हटा, 13.37 एकड़ जमीन खाली कर”: श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से न्यायालय में सिविल याचिका दायर

माननीय सर्वोच्च न्यायालय के राम जन्मभूमि और बाबरी मामले में ऐतिहासिक निर्णय को एक साल पूर्ण होने आया हैं। इसी के बीच अब मथुरा और काशी का मामला भी तुल पकड़ता दिखाई दे रहा है।

उत्तरप्रदेश के मथुरा में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था, यह स्थित 13.37 एकड़ श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर एक सिविल सूट याचिका न्यायालय में दायर हुई हैं। इस दायर याचिका में शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने और श्री कृष्ण जन्मभूमि की मथुरा स्थित पूरी जमीन खाली कराने कि मांग की गई है।

यह याचिका भगवान श्री कृष्ण विराजमान की ओर से विनीत जैन के द्वारा दायर की गई है। दायर याचिका में कहा गया है कि कटरा केशव देव की पूरी भूमि के प्रति हिन्दुओं कि अपार आस्था हैं। और यह बात सही भी है। की हिंदुओ की बड़ी आस्था भगवान श्री कृष्ण में हैं, मथुरा जिनकी जन्मस्थली हैं।

अदालत में दायर इस याचिका में कहा गया है कि कटरा केशव देव वे ही क्षेत्र हैं, जहां पर रजा कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। और वह पवित्र स्थल मस्जिद के नीचे हैं। साथ ही याचिका में मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थित मंदिर को ध्वस्त करने के लिए मुगल बादशाह औरंगजेब को जिम्मेदार ठहराया गया है। दायर याचिका में लिखा गया है कि औरंगज़ेब कट्टर इस्लामी था और उसने ही सन 1669-70 में इस मंदिर को ध्वस्त करने का आदेश जारी कर किया था ।कुल मिलाकर याचिका में मंदिर ध्वस्त के लिए औरंगज़ेब को दोषी माना गया है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर याचिका करने वाले की तरफ से कोर्ट में पैरवी कर रहे वकील हरिशंकर जैन और विष्णु जैन ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि इस याचिका में मांग की गई है कि उत्तरप्रदेश के मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाया जाए और वहां स्थित ढांचे को भी।

आपको बता दे कि अयोध्या में कोर्ट के आए ऐतिहासिक फैसले के बाद से ही काशी विश्वनाथ और मथुरा को मुक्त कराने की मांग उठने लगी हैं इसको लेकर एक अभियान भी शुरू हो गया है। आपको बता दे की काशी में भी भगवान विश्वनाथ को मुगल बादशाह औरंगजेब ने है नुकसान पहुंचाया था। मंदिर को ध्वस्त किया था।

आपको बता दे कि अगस्त के महीने में ही “श्री कृष्ण जन्मभूमि निर्माण न्यास” का गठन हुआ है, जो इस भूमि को मुक्त कराने के लिए तेज प्रयास करेगा। कई राज्यों के सातों ने एक साथ आकर एकता दिखाई थी, जिनमें 11 संत तो वृंदावन के ही थे। इससे पता चलता हैं की यह अभियान कितना बड़ा हैं।

लेकिन इस अभियान के लिए सबसे बड़ी बाधा हैं नरसिम्हा राव सरकार द्वारा 1991 में लाया गया “प्लेसेस ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजन) एक्ट” इस एक्ट के द्वारा सभी धार्मिक स्थलों पर यथास्थिति बरकरार रखा गया था ।

Written by Devraj Dangi

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