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मोदी ने हिंदी, कश्मीरी व डोंगरी को दिलाया न्याय, तीनों बनी J&K की आधिकारिक भाषा, संसद ने लगाई मुहर

संसद ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए जम्मू – कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक -2020 को पारित कर दिया है। यह बिल पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा से ध्वनिमत से पारित हुआ है।

इससे पहले उर्दू और अंग्रेजी को था आधिकारिक भाषा का दर्जा

इस बिल के बाद जम्मू कश्मीर की आधिकारिक भाषा में हिंदी, कश्मीरी और डोगरी को जगह मिली है, इससे पहले राज्य की आधिकारिक भाषा सिर्फ उर्दू और अंग्रेजी को यह दर्जा प्राप्त था।

राज्यसभा में गृहराज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि राज्य के लोगों की लंबे समय से यह मांग थी कि जो भाषा को वह बोलते हैं उसे आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया जाए।

1 प्रतिशत लोग बोलते हैं उर्दू सिर्फ

जनगणना 2011 के मुताबिक जम्मू कश्मीर में उर्दू बोलने वालों की संख्या 1 प्रतिशत के आसपास थी जबकि डोगरी बोलने वालों की संख्या 76 प्रतिशत के करीब।इसके बावजूद भी वहां की सरकारों ने इन भाषाओं को राज्य की आधिकारिक भाषा में शामिल नहीं किया था।

स्थानीय भाषा को भी मिलेगा बढ़ावा

सरकार ने कहा कि इन भाषाओं के अलावा भी स्थानीय भाषा जैसे गुर्जरी आदि के प्रोत्साहन और बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रयास करेगी।

Written by Devraj Dangi

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