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चीन के तुरपान शहर में 15 यातना शिविरों में कैद हैं उइगर मुस्लिम, लेकिन फिर मुस्लिमों के तथाकतिथ आका पाक, तुर्की, मलेशिया क्यों हैं मौन ?

चीन में की वामपंथी सरकार किस तरह अन्य धर्म के लोगों परेशान कर रही हैं यह पूरी दुनिया जानती हैं। चीनी सरकार खासकर मुस्लिम समुदाय के लोगों के अधिकारों का हनन कर रही हैं, उन्हें धार्मिक क्रिया कल्पों पर जबरन प्रतिबन्ध लगा रही ये सब जानते हैं। चीन के उत्तर-पश्चिम प्रांत शिनजियांग के तुरपान शहर में 15 और यातना शिविरों का पता चला है, जहां इन शिविरों मे उइगर मुस्लिमों को कैद करके रखा गया है। ये ठिकाने उसी इलाके में हैं, जहां दिग्गज अमेरिकी प्रोडक्शन हाउस डिज्नी की नई फिल्म ‘मुलान’ के कई दृश्यों को फिल्माया गया है। इस फिल्म की कहानी का सीधा संबंध चीन से है। वॉशिंगटन स्थित एक उइगर संगठन ने यह जानकारी साझा की है। यहाँ पर इन्हे पीड़ताड़ित किया जाता हैं।

डिजनी की हुईं आलोचना

उइगर मुस्लिमों के लिए बनाये गए ये यातना शिविरों की नई जानकारी सामने आने के बाद डिज्नी भी निशाने पर आ गई है। 11 सितंबर को पूरे चीन में रिलीज होने जा रही इस फिल्म को लेकर विवाद इसलिए पैदा हुआ कि फिल्म निर्माण में सहयोग के लिए डिज्नी ने तुरपान के जन सुरक्षा विभाग और कम्युनिस्ट पार्टी के प्रचार विभाग का आभार जताया है। ये चीन सरकार की वही संस्थाएं हैं, जो उइगर मुस्लिमों की सामूहिक नजरबंदी के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार मानी जाती हैं। फिल्म की मुख्य किरदार लियू याइफी की भी इस बात के लिए आलोचना की जा रही है उन्होंने लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हांगकांग पुलिस का समर्थन किया है। इसलिए अब यह फिल्म को लोकतंत्र समर्थकों के विरोध का सामना करना पड़ेगा।

130 किलोमीटर के दायरे में 10 यातना शिविर

चीन के उइगरों के लिए समर्पित संस्था ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल अवेकनिंग मूवमेंट (ईटीएनएएम) ने इस बार चीन के तुरपान क्षेत्र के 130 किलोमीटर के दायरे में 10 यातना शिविरों और पांच कारागारों की सटीक जानकारी मुहैया कराई है। इससे पहले पिछले साल नवंबर में ईस्ट तुर्किस्तान में स्थित 182 यातना शिविरों, 209 कारागारों और 74 श्रम शिविरों का ब्योरा दिया गया था। इससे साफ होता हैं कि किस तरह चीन मुस्लिमों के खतरनाक मुल्क बनता जा रहा हैं या यू कहे तो चीन उइगर समुदाय के लिए नर्क से कम नहीं हैं।

ह्यूमन राइट्स आर्गेनाइजेशन ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ ने भी ट्वीट कर डिज्नी की आलोचना की है। इसमें कहा गया है कि डिज्नी ने शिनजियांग प्रांत में शूटिंग की, लेकिन उइगर मुस्लिमों के मानवाधिकारों का ख्याल नहीं रखा। इस संस्था के अलावा ब्रिटिश सांसदों ने चीन और डिज्नी की आलोचना की हैं।

ब्रिटिश संसद सदस्यों की चिट्ठी चीनी राजदूत के नाम

ब्रिटिश संसद के 130 सदस्यों ने चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों के सामूहिक उत्पीड़न की निंदा करते हुए चीनी राजदूत को एक पत्र लिखा है। इसमें मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन तुरंत बंद करने को कहा गया है। पत्र में जबरन नसबंदी, सामूहिक नजरबंदी से जुड़ी रिपोर्ट के अलावा कुछ वीडियो का हवाला दिया गया है, जिनमें उइगर मुस्लिमों पर अत्याचार के दृश्य कैद हैं। लेकिन खास बात ये हैं कि दुनिया के तमाम मुल्क जो अपने आपको मुस्लिमों का रहनुमा कहते हैं ने चीन की इस करतूत पर आवाज़ तक नहीं उठाई हैं।

पाकिस्तान, मलेशिया और तुर्की जैसे देश जो एक लोकतान्त्रिक देश भारत में कश्मीर और मुस्लिमों को लेकर झूठी खबरों को फ़ैलाने, भारत को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर बदनाम करने की साजिश और कोशिश करते रहते हैं आज चीन के उइगर मुस्लिमो के लिए इनकी आवाज़ भी नहीं निकलती हैं। सिर्फ ये भारत का ही विरोध करते रहते हैं।

Written by Devraj Dangi

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