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प्रियंका गांधी के विवादित घर से जुड़े तथ्य

शिमला में प्रियंका गांधी का घर घेरे में आ रहा है। मुंबई में कंगना रनाउत के ऑफिस को गिराने के बाद लोग प्रियंका गांधी के घर पर निशाना साध रहे है।

2008 से निर्माणाधीन इस घर से जुड़े कई विवाद और कई रीडिजाइन के किस्से सामने आए हैं।
आइए इस घर के आसपास के कुछ विवादों पर दोबारा गौर करते हैं।

—वाड्रा ने शिमला से 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पहाड़ियों में 3 बीघा कृषि भूमि का एक प्लॉट खरीदा था । 8000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह प्लॉट यूएस आधारित “सतीश कुमार सूद” और “सतिंदर सूद” से लगभग 47 लाख में खरीदा गया था । तत्कालीन हिमाचल प्रदेश सरकार ने भूमि सुधार और किराएदारी की धारा 118 के तहत नियमों में ढील दी थी क्योंकि राज्य में जुड़े जमीन के कानून के मुताबिक केवल स्थाई निवासियों राज्य में जमीन खरीद सकते हैं।

अन्य लोग जो जमीन खरीदना चाहते हैं उन्हें कानून के तहत छूट प्राप्त करनी होगी । यह प्लॉट भारत के राष्ट्रपति के समर रिसोर्ट से सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर है इस निकटता के कारण राष्ट्रपति सचिवालय से घर के लिए मंजूरी लेनी पड़ी थी।

—-घर का निर्माण 2008 में शुरू हुआ था । वाहा मौजूद दो मंजिला झोपड़ी को गिराया गया था क्युकी प्रियंका चाहती थी कि घर के आसपास के नजारा खूबसूरत हो और प्रकर्ती का एहसास हो। वेह नहीं चाहती थी कि उसके घर के इर्द गिर्द कोई गंदगी दिखे और इसी की वजा से उसने गरीबों की झोपड़ी हटाने का आदेश दिया था।

—-2010 में आंशिक रूप से निर्मित आधे से ज्यादा घर को गिरा दिया गया था क्योंकि निर्माण की गुणवत्ता यानी कि घर के निर्माण में लगाई हुई चीजें जैसे कि सीमेंट, लकड़ी , पत्थर आदि खराब क्वालिटी के थे और प्रियंका घर से खुश नहीं थी । एक नए वास्तुकार और एक नए डिजाइन के साथ निर्माण को फिर शुरू किया गया । 2011 और 2013 में दो जमीने दो अलग-अलग मालिकों से खरीदी गई ताकि घर के लिए सड़क निकाली जाए और नई डिजाइन को समायोजित किया जाए।

—-देवेंद्र जीत , जो प्रियंका वाड्रा की संपत्ति के बगल में एक बड़ी जमीन का मालिक है , अपनी जमीन पर एक होटल बनाना चाहता था लेकिन सरकार ने उच्च सुरक्षा रिट्रीट के निकटता का हवाला देते हुए उनके आवेदन को खारिज कर दिया यहां तक कि हाईकोर्ट ने भी इस मामले में उनकी अपील खारिज कर दी थी क्योंकि उनकी जमीन प्रियंका लेना चाहती थी । उसने देवेंद्र जीत की जमीन जबरन हासिल की।

—-2014 में आरटीआई के एक्टिविस्ट देवाशीष भट्टाचार्य ने आरटीआई के तहत एक आवेदन दायर कर घर के बारे में जानकारी मांगी । आवेदन को खारिज कर दिया गया था , और इस खारिज करने की वजह यह बताई गई कि सुरक्षा कारणों की वजह से ऐसी जानकारी का खुलासा नहीं किया जा सकता है क्योंकि प्रियंका एक एसपीजी सुरक्षा कर्ता है। भट्टाचार्य ने राज्य सूचना आयोग से संपर्क किया और जून 2014 में आयोग ने राज्य सरकार को 10 दिनों के भीतर मांगी की जानकारी प्रदान करने का निर्देश दिया।

—-सूचना आयोग के आदेश के बाद प्रियंका वाड्रा ने आदेश को चुनौती देते हुए हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी और उच्च न्यायालय ने आरटीआई आवेदन के खिलाफ जानकारी प्रकट करने के आदेश पर रोक लगा दी थी । अप्रैल 2016 में उच्च न्यायालय ने इस मामले में प्रियंका वाड्रा को नोटिस जारी किया।

—- आशीष भट्टाचार्य पर भूमि को खरीदने की मंजूरी देने और फाइल नोटिंग , बिक्री कार्यों , करने की छूट दी जा रही है। प्रियंका की भूमि की स्थिति के बारे में कई अनियमितताओं का आरोप है । जिन अनियमितताओं का आरोप लगाया जा रहा है वह कुछ इस प्रकार हैं :-

1, भूमि सुधार और किराएदारी अधिनियम की धारा 118 के तहत केवल एक उद्देश्य के लिए केवल एक ही बार जमीन खरीदी जा सकती है लेकिन इस मामले में जमीन तीन बार खरीदी गई थी और अलग-अलग उद्देश्यों के लिए– जैसे कि घर और बागवानी का निर्माण।

2, कानून के तहत इस उद्देश्य के लिए गठित एक अनुमति बोर्ड द्वारा बागवानी उद्देश्य के लिए खरीदी जाने वाली भूमि को मंजूरी दी जा सकती है । भट्टाचार्य कहते हैं कि इसका कोई बोर्ड गठित नहीं किया गया था । उन्होंने बागवानी के उपाय की मंजूरी पर भी सवाल उठाया था कि जब प्रियंका वाड्रा को बागवानी में कोई विशेषज्ञता नहीं है तो प्रियंका जमीन केसे ले सकती हैं।

3, अधिनियम के अनुसार घर बनाने के लिए अनुमोदित भूमि पर 2 साल के भीतर घर का निर्माण पूरा किया जाना चाहिए अन्यथा भूमि वापस करनी होगी लेकिन प्रियंका वाड्रा को 2 साल से ज़्यादा का समय लग गया था क्योंकि उनका घर पूरा नहीं हुआ
और एक बार गिराया भी जा चुका था । राज्य की कांग्रेस सरकार ने विस्तार का आदेश दिया था ।

4, जून 2016 में हिमाचल प्रदेश के भाजपा विधायक सुरेश भारद्वाज ने सदन में आपत्ति जताते हुए कहा कि यह एक उच्च सुरक्षा क्षेत्र है और इस तरह की गतिविधियों की अनुमति ऐसे क्षेत्र में नहीं है उन्होंने कहा कि घर राष्ट्रपति रिट्रीट और कल्याणी हेलीपैड के करीब है और क्षेत्र के लोगों को अतीत में ऐसी अनुमति से मना कर दिया गया है।

प्रधानमंत्री जैसे वीआइपी भी अपनी यात्राओं के दौरान रिट्रीट में रहते हैं और हेलीपैड विशेष रूप से वायु सेना द्वारा ऐसी वीआईपी आंदोलन के लिए होता है। इसलिए घर के लिए दी गई अनुमति को वापस लिया जाना चाहिए विधायक ने मांग की थी।

Written by Abhinav Thakur

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