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दलित युवकों ने चंद्रशेखर रावण जैसे फर्जी भीमवादियों को दिया करारा जवाब, अब ‘जय भीम- जय मीम’ नहीं ‘जय वाल्मीकि – जय श्रीराम’ का नारा गूंजा !

चंद्र शेखर आज़ाद उर्फ़ रावण जैसे लोगों हिन्दू समाज को तोड़ने की भरपूर कोशिश कर रहे, जहाँ चंद्रशेखर भीम आर्मी तो कुछ अन्य नाम के संगठन राजनीति के चलते दलित समाज को बरगला कर हिन्दू समाज का विभाजन करना चाहते हैं। उनके सर्मथन में कुछ मुस्लिम भी सहयोग करने आ जाते हैं और ‘जय भीम – जय मीम’ का नारा ओवैसी जैसे लोग लगाते हैं।

Credits: TV9 Bharatvarsh

रावण जैसे लोग हिन्दू देवी – देवताओं के खिलाफ झूठा प्रचार करते हैं, हिन्दू ग्रंथों को दलित विरोधी बताते हैं तो हिन्दू समाज को दलित विरोधी बता कर उन्हें हिन्दू धर्म से अलग करना चाहते हैं। लेकिन अब दलित युवक खुद सामने आकर ऐसे लोगों को जवाब देंने लग गए हैं। उन्हें हिन्दू धर्म में फिर से आस्था जगाने ने का काम विश्व हिन्दू परिषद कर रही हैं।

दलित युवकों ने ‘जय भीम – जय मीम’ को टक्कर देने के लिए नया नारा ‘जय बाल्मीकि – जय श्रीराम’ का शुरुआत किया हैं। हरियाणा के गुहाना के 52 गांव के युवाओं ने भीम आर्मी के नीले गमछे को उतार कर भगवा धारण किया हैं। दलित युवाओं ने संतान धर्म की रक्षा का भी संकल्प लिया हैं। VHP की कोशिशों के बाद स्थानीय वाल्मीकि समाज के लोगों ने सामाजिक समरसता भवन (Social Harmony Building) भी बनाकर तैयार किया हैं। VHP के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार (Alok Kumar) के मुताबिक, अनुसूचित जाति के लोग हिंदू समाज के अटूट अंग हैं. कोई भी साजिश उन्हें अलग नहीं कर सकती। परिषद ने बताया की दलित “डॉ. अंबेडकर ने संघ के दूसरे सरसंघचालक गुरुजी से कहा था कि यदि हिन्दू संत घोषित कर दें कि छुआछूत (Untouchability) हिंदू समाज का हिस्सा नहीं है, तो छुआछूत की भावना मिट सकती है, जिसके बाद विश्व हिंदू परिषद के 1969 में उडुपी के सम्मेलन में समाज से ऊंच-नीच का भेदभाव मिटाने का प्रस्ताव पास किया गया था. तब से विश्व हिंदू परिषद देश से छुआछूत को खत्म करने के लिए काम कर रही है।”

कुछ कटटरपंथी मुस्लिम नेता भी हिन्दू समाज में टूट का फायदा उठाना चाहते हैं। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि “AIMIM मुखिया असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेता दलितों को बहकाने और भड़काने की कोशिश करते हुए ‘जय भीम-जय मीम’ का नारा लगाते हैं. उन जैसे नेताओं को हरियाणा के वाल्मीकि समाज के युवाओं ने एक ही नारा एक ही नाम, जय वाल्मीकि जय श्री राम के जरिए मुंहतोड़ जवाब दिया है।”

Written by Devraj Dangi

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