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चीन को बड़ा आर्थिक झटका, अब चीन से कच्चा तेल नहीं खरीदेंगी भारतीय कम्पनियां

सीमा पर तनाव बढ़ने के बाद भारत ने चीन की रणनीतिक घेराबंदी तेज कर दी है। चीन से आयात पर कई तरह की सख्ती के बाद अब भारतीय तेल कंपनियां वहां से कच्चा तेल खरीदना बंद करके एक बड़ा झटका देने वाली हैं। सूत्रों के मुताबिक भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और मंगलोर रिफाइनरी सहित कई भारतीय कंपनियां नए नियमों के तहत अपने आयात की शर्तों को संशोधित कर रही हैं। माना जा राह है कि चीन के लिए एक हफ्ते में दूसरा बड़ा झटका होगा। इसके पहले सउदी अरब की अरामको चीने से हजारों करोड़ डॉलर का करार खत्म कर चुकी है।

सूत्रों के मुताबिक भारतीय कंपनियां चीन की जिन कंपनियों से कच्चा तेल खरीदना बंद करने वाली हैं उनमें पेट्रोचाइना, यूनीपेक और क्नो लिमिटेड शामिल हैं

पिछले महीनें भारत ने आयात नियमों में कई तरह के बदलाव किए थे। इसके तहत सरकार द्वारा पड़ोसी देशों से आयात को लेकर नियम सख्त कर दिए गए थे। सूत्रों का कहना है कि भारतीय कंपनियां इस नियम के आने के बाद से आयात कारोबार में इसी से संबंधित एक क्लॉज जोड़ रही हैं। इसके बाद कंपनियां चीन से तेल खरीदना बंद कर देंगी। हालांकि, फिलहाल किसी भी भारतीय सरकारी तेल कंपनी ने इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसके पहले जून में जून में लागू नए सशोधित निर्यात-आयात नियमों के नियम तहत भारतीय टेंडरों में भागीदारी के लिए पड़ोसी देशों की कंपिनयों को वाणिज्य विभाग में पंजीकृत होना आवश्यक है। पिछले दिनों इसको लेकर एक और नियम जोड़ा गया है जिसमें कंपनियों को पिछले पांच साल का विवरण भी देना होगा। नियम के अनुसार भारत की जिन देशों से सीमाएं लगती है उन्हीं देशों पर नए आयात नियमों को लागू किया गया है। हालांकि सरकार द्वारा किसी देश का नाम नहीं लिया गया लेकिन इसका लक्ष्य चीन है।

तेल आपूर्ति पर नहीं पड़ेगा असर

मांग कम होने से भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के तेल भंडार अभी भरे हुए हैं। इसकी वजह से कंपनियां अभी अपनी रिफाइनरी क्षमता का 50 फीसदी के करीब उपयोग कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन से आयात बंद होने की स्थिति में फिलहाल कंपनियां अपने तेल भंडार का उपयोग करेंगी। इसके अलावा भारत ने पिछले छह माह में ऊर्जा क्षेत्र में कई रणनीतिक साझेदारी की हैं। ऐसे में आगे के लिए अमेरिका और खाड़ी देशों से आपूर्ति बढ़ाई जा रही है। इस स्थिति में भारत में तेल आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

रणनीतिक भंडार भर रहा भारत
रणनीतिक भंडार को भरने के लिए भारत ने पिछले एक साल में कई कई समझौते किए हैं। इससे आयात बिल में सालाना 25 हजार करोड़ रुपये की बचत होगी। हाल ही में अमेरिका से एक करार के तहत भारत वहां कच्चे तेल का भंडारण करेगा। इसके पहले आईएसपीआरएल ने 25 लाख टन के पादुर भंडार को आधे के किराये के लिए एडनॉक के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया है। पिछले साल इसने पादुर भंडार की एक चौथाई क्षमता को किराया पर देने के लिए सऊदी अरैमको के साथ भी एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। आईएसपीआरएल ने मंगलोर के 15 लाख टन के भंडार के आधे हिस्से को पहले ही एडनॉक को किराए पर दे दिया है। इसने विशाखापत्तनाम के 10.3 लाख टन के भंडार को भी इराक के बासरा तेल से भर लिया है।

Written by Ojas Nihale

एक लेखक अपनी कलम तभी उठाता हैं, जब उसकी संवेदनाओ पर चोट हुई हों !! पत्रकारिता में स्नातकोत्तर...
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