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राजस्थानी सियासत: भाई- बहिन की जोड़ी लाई रंग, गहलोत को फिर मिलेगा पायलट का संग!

सचिन पायलट ने राहुल और प्रियंका गांधी से मिलने के बाद वापस कांग्रेस ऑर गहलोत के साथ लौटे । इसी के साथ राजस्थानी सियासी संकट समाप्त हो गया है।

कल राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम और कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से दिल्ली में मुलाकात की, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस में बने रहने का निर्णय किया। जिससे गहलोत सरकार की उम्र जरूर बढ़ गई है और सत्ता बच गई।

मीडिया से बातचीत करते हुए सचिन पायलट ने कहा कि, रात गई बात गई, यह उन्होंने उस बात पर कहा जब मीडिया उन पर लगे आरोपों के बारे में पूछा था। उन्होंने कहा कि मैं पहले भी बोल चुका था कि मैं पार्टी नहीं छोडूंगा और पार्टी में ही मुद्दा उठाऊंगा।

जब मीडिया ने उनसे उनके भविष्य के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि, भविष्य में क्या होगा मुझे नहीं बता। यानी उन्होंने भविष्य कि योजना के बारे अभी कोई पत्ते नहीं खोले।

लेकिन मीडिया सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है कि राहुल – प्रियंका के बीच हुई पायलट की बैठक में उन्होंने कुछ शर्ते रखी है और जिन्हे कांग्रेस मान भी ली। खबरों के अनुसार पायलट को पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव बनाया जा सकता है, उनके समर्थक और बागी विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह दी जाएगी। संभवत उनके खेमे से दो डिप्टी सीएम बनेंगे।

पायलट कांग्रेस में अपनी वापसी उसी अंदाज़ में चाहते हैं जैसे उन्होंने में विद्रोह किया था। उन्होंने यह भी कहा, कि पद और सत्ता आती – जाती रहेगी मैं राजस्थान कि जनता की सेवा करूंगा। पार्टी ने 20 सालों में को भी जिम्मेदारी दी हैं उसे निष्ठा पूर्ण निभाया और पार्टी जो तय करेगी वह करूंगा।

आपको बता दे कि सचिन पायलट और सीएम गहलोत के बीच मतभेद इस क़दर बढ़ गए थे कि उन्होंने गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष और डिप्टी सीएम दोनों पदों से हटा दिया था। लेकिन राहुल और प्रियंका की कोशिश रंग लाई और पायलट को मना लिया।

Written by Devraj Dangi

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