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क्या हिन्दू मंदिर निर्माण से इस्लाम की भावनाओं को ठेस पहुंचती हैं?

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में पहले हिन्दू मंदिर की आधारशिला मंगलवार को रखी गई। मंदिर निर्माण का कार्य शुरू होने से पहले ही इसका विरोध शुरू हो गया हैं। कट्टरपंथियों ने इसके खिलाफ फतवा जारी कर दिया और कई नेताओ ने इसे इस्लाम का अपमान तक कह डाला।

क्या है पूरा मामला ?


पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हिन्दू पंचायत कि देखरेख में भगवान श्री कृष्ण के मंदिर निर्माण की आधार शिला रखी गई थी। यह राजधानी के एच-9 क्षेत्र में लगभग 20 हजार वर्ग फुट में बनाया जाएगा। जानकारी के मुताबिक यह इस्लामाबाद में पहला हिन्दू मंदिर होगा। जिसका भूमि पूजन मंगलवार को मानवाधिकार आयोग के संसदीय सचिव लाल चंद मल्ही द्वारा किया गया था।

क्यों हो रहा विरोध ?


मंदिर निर्माण से पहले ही मुस्लिम कट्टरपंथियों ने इसका विरोध करना शुरु कर दिया है। पाकिस्तान की इमरान खान सरकार में शामिल सत्ताधारी दल पीएमएल-Q के प्रमुख और पंजाब असेम्बली के स्पीकर चौधरी परवेज इलाही ने कहा कि “पाकिस्तान का निर्माण इस्लाम के नाम पर हुआ था । इसकी राजधानी में मंदिर निर्माण न सिर्फ इस्लाम कि भावनाओं के खिलाफ हैं, बल्कि कल्याणकारी इस्लामिक राज्य की अवधारणा के खिलाफ है।”

परवेज इलाही ने यह मान लिया हैं कि भारत का विभाजन धर्म के नाम किया गया था और इस्लाम के नाम पर ही पाकिस्तान बना। चौधरी ने यह तक कह दिया कि अगर मंदिर का निर्माण होता है तो वो इस्लाम के खिलाफ हैं और कल्याणकारी राज्य के खिलाफ हैं इसका मतलब यह हैं कि वह कहना जा रहे पाक सिर्फ मुस्लिमों का देश है तो फिर हिंदुस्तान हिंदुओ।

चौधरी परवेज इलाही पाक के पंजाब प्रांत की असेम्बली के स्पीकर हैं और पाक सरकार में उसकी पार्टी पीएमएल – Q भी शामिल हैं । जिससे साफ जाहिर होता है कि पाक में हिंदुओं की क्या दशा होगी। आए दिन इस्लामाबाद में हिन्दू बेटियों का जबरन धर्मान्तरण और अपहरण होता हैं जब यह कट्टरपंथियों को इस्लाम का अपमान नहीं दिखता है।

10 करोड़ दिए इमरान सरकार ने

इस्लामाबाद में पहले ही मंदिर निर्माण के लिए पाकिस्तान की इमरान सरकार ने 10 करोड़ रुपए जारी किए। जिनका उपयोग मंदिर निर्माण में होना हैं । जिसे लेकर ही पाक में सबसे ज्यादा श्री कृष्ण मंदिर का विरोध किया जा रहा।

मानवाधिकार के संसदीय सचिव लाल मल्ही कृष्ण मंदिर का भूमि पूजन करते हुए!

आयोध्या मामले में भारतीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर इमरान ने किए थे सवाल

जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने एक लंबे समय के बाद पूरी न्यायिक प्रक्रिया के उपरांत अायोध्या मामले में फैसला सुनाते विवादित भूमि राम लला को दी । उस निर्णय पर पाक पीएम और उनके विदेश मंत्री ने भारत में मुस्लिमों को खतरा बताया था।जबकि इन कट्टरपंथी मुस्लिमों को ज्ञात होना चाहिए कि हिंदुस्तान में कई मस्जिदें हैं लेकिन यहां तो हिन्दू धर्म खतरे में नहीं आता न ही हिंदुत्व का अपमान होता है तो फिर पाक में कैसे ?

यही नहीं कई कट्टरपंथी संगठनों ने तो फतवा जारी करते हुए तत्काल मंदिर निर्माण पर रोक लगाने की बात तक कह दी और इमरान सरकार के फैसले को इस्लाम का विरोधी करार दे दिया। एक मजहबी शिक्षा देने वाले संस्थान ने कहा कि “गैर मुस्लिमो के लिए मंदिर या अन्य धार्मिक स्थल बनाने में सरकारी धन खर्च नहीं किया जा सकता।

भारत के भी कई कट्टरपंथि मुस्लिम हिंदुओ के राम मंदिर के फैसले के समय कई प्रकार की बाते कर रहे थे उन्हें चौधरी परवेज इलाही की बातों पर ध्यान देने की जरूरत है । जिसने यह साफ कर दिया कि पाक का निर्माण इस्लाम के नाम पर हुआ और अगर पाक इस्लाम के नाम पर बना तो बचा शेष भारत हिंदुओ का हैं।

क्या कुछ बोलेंगे भारत के कट्टरपंथी और हिंदुओ को कोसने वाला मीडिया

पाक में हिंदू मंदिर निर्माण का विरोध हो रहा क्योंकि पाक का निर्माण इस्लाम के नाम पर हुआ तो मंदिर निर्माण क्यों। विरोध का दूसरा कारण हैं सरकार क्यों धन दे रही। कुछ भारत के कुछ तथा कथित बुद्धिजीवी और कट्टरपंथी मुस्लिम स्कॉलर्स राम मंदिर पर कई सवाल खड़े करते है वह इस मामले पर पाक से कुछ कहेंगे। यहां भारत में जो जनता के टैक्स से हज यात्रियों को दी जाने वाली सब्सिडी के बारे कुछ बोलेंगे। जो बात – बात पर हिंदुओ को निशाने पर लेने का मौका तलाशते रहते हैं। भारत के आंतरिक मामलों में जबरन राय देने वाले इमरान के बड़बोले विदेश मंत्री कुरैशी अपने नेताओं और मुस्लिम कट्टरपंथियों को कुछ कहेंगे ? यह देखना होगा।

Written by Devraj Dangi

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