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पुलिस हिंसा से रोके तो बर्बर, तुम पुलिस को लहूलुहान करो तो बेचारे ?

नागरिकता कानून को लेकर देशभर के कई हिस्सों में आगजनी और हिंसक प्रदर्शन हुए जिसमे हजारो करोड़ की सम्पत्ति को उग्रवादियों ने नुकसान पहुंचाया !
अगर इन्हे हिंसा करते रोका नहीं जाता या पुलिस प्रशासन द्वारा उचित कार्यवाही नहीं की जाती तो सोचिये प्रदर्शन की आड़ में ये दंगाई कितने हिंसक और उग्र हो जाते !
क्या उन्हें हिंसा, आगजनी और शासकीय सम्पत्ति को नुकसान करने के लिए खुला छोड़ दिया जाना चाहिए

अविकसित मानसिकता वाले स्वघोषित बुद्धिजीवी कहे जाने वालो का एक तबका पुलिस को दोष दे रहा है ?
समझ ये नहीं आ रहा की किस बात का दोष दे रहे है तथाकथित बुद्धिजीवी
हिंसा को रोका इस बात का या जो प्रदर्शनकारी उग्र हो रहे थे आगजनी कर रहे थे या पुलिस पर पथराव कर रहे थे उन्हें खदेड़ा इस बात का
पुलिस अगर उग्र हो रहे प्रदर्शनकारियों को रोकती नहीं तो न जाने कितने पुलिस वाले या आम जनता में से कितनी मौते हो जाती

इन्होने हेडलाइन दी की यूपी से पुलिस बर्बरता की दहलाने वाली भयानक रिपोर्ट
क्या भई ? जब दंगाइयों के द्वारा पुलिस पर बर्बरता पूर्वक पत्थर फेके जाते है उन्हें लहूलुहान किया जाता है जब ये वामपंथी सोच से दूषित लोग हसने वाली इमोजी शेयर कर मजाक उड़ाते है !

पिछले हफ्ते पश्चिम बंगाल में जुमे की नमाज के बाद क्या हुआ ये वामपंथ मिडिया और स्वघोषित अर्बन नक्सलों ने क्यों नहीं बताया और क्यों नहीं निंदा की जब मंदिरो को तोडा जा रहा था, हिन्दुओ की दुकानों में घुसकर उसमे तोड़फोड़ की जा रही थी, कुछ ही समय में 250 करोड़ की सम्पत्ति को दंगाइयों ने नष्ट कर दिया था !
ये न तो एनडीटीवी बताएगा न बीबीसी और न ही कोई वामपंथ मिडिया के लुप्त होते चैनल, क्योकि इसमें उन्हें दंगाइयों द्वारा तोड़फोड़ या पुलिस वालो को लहूलुहान करने का आनंद मिलता है,
हिंसा की समर्थन विचारधारा तो हिंसा को ही समर्थन करेगी न !

मेरठ में दंगाइयों ने पुलिस थाने को जलाने का प्रयास किया जबकि उसमे पुलिसकर्मी भी मौजूद थे, क्या उनका घर नहीं क्या उनके बच्चे नहीं लेकिन फिर भी मिडिया इन दंगाइयों को प्रदर्शनकारी बताकर उन्हें बचाने का प्रयास कर रही है क्या ये दंगाई नहीं है ? अगर इन्हे उग्रवादी अलगाववादी भी कहा जाये तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी ! हां ये अलग बात है की इस बात से वामपंथी मिडिया को बुरा लगेगा जो इन उग्रवादियों को मासूम साबित करने के लिए एड़ी छोटी का जोर लगा देती है !

नागरिकता कानून पर केंद्र सरकार, गृहमंत्री अमित शाह कई बार कह चुके है की इस बिल से भारत के किसी भी मुसलमानो को कोई समस्या नहीं होगी यह बिल नागरिकता देने का है न की लेने का
लेकिन वामपंथ से ग्रसित और सीमित मानसिकता के लोग जनता को बरगला कर देश में अराजकता का माहौल पैदा कर रहे है
केवल और केवल इसलिए की वो अपने निजी स्वार्थ के लिए अराजक माहौल के लिए सरकार पर आरोप लगा सके !

हाल ही में सेना प्रमुख ने अपने बयान में कहा की ”लीडर वो नहीं जो हिंसा के लिए लोगो को भटकने का काम करे, लेकिन खाली दिमाग वाले नेताओ ने सेना प्रमुख की शांति कायम करने वाली बातो को नजरअंदाज कर उनपर भी अनर्गल बयानबाजी करना शुरू कर दिया !
एक बार सोचिये देश के सेनाप्रमुख जो देश में फेल रही हिंसा और अराजकता के लिए शांति का संदेश रहे है उन्हें भी अपनी इस गंदी राजनीती में घसीट लिया,और उनके सहारे अपनी लुप्त हो रही राजनीती को चमकाने का भद्दा प्रयास रहे है !

वामपंथी कभी आकड़ो पर बात नहीं करते क्योकि वो खाली दिमाग है तो अध्ययन कैसे कर सकते है, चलिए हम बता देते है या खुद आकड़े उठा कर देख लो की अब तक जितनी भी गिरफ्तारियां हुई है उसमे एक भी निर्दोष नहीं है सरे के सरे दंगाई है न की प्रदर्शनकारी, दंगाई इसलिए की हिंसा दंगाई ही पत्थर उठाते है और हिंसा फैलते है जबकि प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते है !
दंगाई और प्रदर्शनकारी में अंतर् है, हिंसा और अहिंसा में अंतर् है
दंगाई अहिंसा के पुजारी नहीं हो सकते है !
क्या समझे !!

Written by Ojas Nihale

एक लेखक अपनी कलम तभी उठाता हैं, जब उसकी संवेदनाओ पर चोट हुई हों !! पत्रकारिता में स्नातकोत्तर...
कभी सही कभी गलत, जैसा आपका नजरिया !

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