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फांसी से बचने क़ानूनी हथकंडे अपना रहा निर्भया का दोषी, मानवाधिकार का दिया हवाला

नई दिल्‍ली: निर्भया केस (Nirbhaya Gang Rape Case) में दोषी अक्षय (Akshay) की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जस्टिस आर भानुमति की अगुआई वाली वाली 3 सदस्यीय बेंच सुनवाई खत्‍म हो गई. आज दोपहर एक बजे फैसला सुनाया जाएगा. इस बेंच जस्टिस आर भानुमति के अलावा दो अन्य सदस्य हैं जस्टिस अशोक भूषण और ए एस बोपन्ना. अक्षय के वकील ए पी सिंह हैं. इससे पहले चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने 17 दिसंबर को सुनवाई से खुद को अलग किया था. इसलिए नई बेंच बनाई गई. जस्टिस भानुमति और जस्टिस भूषण इससे पहले 3 दोषियों की याचिका खारिज करने वाली बेंच का हिस्सा रहे हैं. चीफ़ जस्टिस के रिश्तेदार का नाम इस केस में पुरानी सुनवाई के दौरान वकीलों की पेशी की सूची में है, इसलिए चीफ़ जस्टिस ने खुद को इस मामले में अलग किया.

निर्भया के दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई खत्‍म, दोपहर 1 बजे आएगा फैसला
photo credit- zeenews

दोषी अक्षय के वकील एपी सिंह को आज बहस के लिए 30 मिनट का समय दिया गया है. वकील एपी सिंह ने कहा कि इस मामले में सीबीआई जांच की मांग उठाई गई थी लेकिन सीबीआई जांच नहीं हुई, लेकिन गुरुग्राम के स्कूल मामले में सीबीआई जांच हुई और बस कंडेक्टर को सीबीआई ने क्लीनचिट दी थी. दरअसल उन्‍होंने गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल केस में स्कूल छात्र की हत्या का उदाहरण दिया. उन्‍होंने कहा कि इस मामले में बेकसूर को फंसा दिया गया था. अगर सीबीआई की तफ्तीश नहीं होती तो सच सामने नहीं आता. इसलिए हमने इस केस में भी CBI जैसी एजेंसी से जांच की मांग की थी.

ए पी सिंह- इस मामले में लड़की के दोस्त ने पैसे लेकर मीडिया को इंटरव्यू दिया जिससे केस प्रभावित हुआ. वो इस मामले में एकमात्र गवाह था

कोर्ट- इन बातों का यहां क्या महत्व है?

ए पी सिंह- वो लड़का इस मामले में एकमात्र चश्मदीद गवाह था…उसकी गवाही मायने रखती है.

एपी सिंह ने कहा कि निर्भया के दोस्त के खिलाफ हमने पटियाला हाउस कोर्ट में केस किया है जिस पर 20 दिसंबर को कोर्ट सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- ये रिलेवेंट कैसे है? सिंह ने कहा कि ये नया सबूत है.

वकील- इस केस में फांसी के बाद एक मां को तो शांति मिलेगी लेकिन चार अन्‍य माएं अपने बेटों को खो देंगी. ये बदला है. वास्‍तविक गुनहगार तो समाज और शिक्षा की कमी है. बलात्‍कारी पैदा नहीं होते, समाज द्वारा बनाए जाते हैं.

सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता- ट्रायल कोर्ट ने सभी दलीलों और सबूतों को परखने के बाद फांसी की सजा सुनाई जोकि सुप्रीम कोर्ट ने भी सही माना. यह ऐसा गंभीर अपराध है जिसे भगवान भी माफ़ नहीं कर सकता. इसमें सिर्फ़ फांसी की सजा ही हो सकती है.

Written by Ojas Nihale

एक लेखक अपनी कलम तभी उठाता हैं, जब उसकी संवेदनाओ पर चोट हुई हों !! पत्रकारिता में स्नातकोत्तर...
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