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एक दिन में हिंसक हुआ ”जामिया मिलिया”, बीएचयू में एक महीने तक चला था शांतिपूर्ण प्रदर्शन

नागरिकता कानून लागू के बाद देश के कई राज्यों में विरोध के नाम पर हिंसा फेल गई है, जिसकी आग जामिया मिलिया विश्विद्यालय और अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय तक पहुंच गयी !
नागरिकता कानून केविरोध में प्रदर्शन कर रहे जामिया मिलिया के छात्र उग्र हो गए और उन्होंने पुलिस पर हमला कर दिया जिसमे कई पुलिस वाले घायल भी हुए ! छात्रों के उग्र प्रदर्शन को देखते हुए जामिया मिलिया को 5 जनवरी तक के लिए बंद कर दिया गया है !

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photo credit- the economic times

लेकिन सवाल यह उठता है की विरोध प्रदर्शन देश के लगभग हर विश्वविद्यालय में होते है जो विद्यार्थियों से जुडी मांगो को लेकर होते है ! लेकिन देश के चुनिंदा विश्वविद्यालयों जैसे जेएनयू, जामिया मिलिया, जाधवपुर यूनिवर्सिटी और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में ही हिंसक प्रदर्शन होते है वो भी विद्यार्थियो की मांगो को लेकर नहीं बल्कि अपने ही देश में आजादी को लेकर होते है
ये वही है जो पढ़ाई के नाम पर राजनैतिक महत्वकांक्षा को पाले हुए है !

यह कितना हास्यपद है की अपने ही देश में अपने ही देश से आजादी मांगना, दरअसल वामपंथ की असली बनावट और इनका मुख्य उद्देश्य ही हिंसा है
वरना आप देश के अन्य विश्वविद्यालयो को देख लीजिये और वहां के विरोध के तरीको को, जामिया और जेएनयू में पल रहे हिंसक छात्रों को बनारस हिन्दू विश्विद्यालय से सिखने की आवश्यता है !

हाल में वहां संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में नियुक्त प्रोफेसर फिरोज खान को हटाने की मांग को लेकर एक महीने तक प्रदर्शन किया गया लेकिन बिना किसी तोड़फोड़ के बिना किसी पथराव और हिंसा के !

जामिया में प्रदर्शन के दौरान ‘नारा-ए-तकबीर’ नारा लगता है, लेकिन बनारस हिन्दू विश्विद्यालय में जय श्री राम के नारे नहीं लगते, फर्क और आंदोलन का तरीका यही दिख जाता है और यही पहचान भी हो जाती है !

जिस नागरिकता बिल को लेकर जामिया मिलिया और अलीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्रों ने उपद्रव फैलाया उन शिक्षित अनपढो को इतनी समझ होना चाहिए की जिस कानून से भारतीय नागरिको का कोई लेना देना है ही नहीं, उसे लेकर हिंसात्मक प्रदर्शन क्यों ? बल्कि पडोसी देशो में सताए गए गैरमुस्लिमों को इस बिल से मदद मिलेगी !

यह बिल किसी भी धर्म के भारत के नागरिक को प्रभावित नहीं करता है। यह अधिनियम केवल उन लोगों के लिए है, जिन्होंने वर्षों से उत्पीड़न का सामना किया है और भारत को छोड़कर उनके पास जाने के लिए कोई अन्य जगह नहीं है।

विरोध और चर्चा, लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाना कितना सही है ? छात्रों का कानून हाथ में लेकर पुलिस पर हमला करना कितना सही है ? क्या यह छात्र है या उपद्रवी ?

क्योकि विरोध तो देश के लगभग हर शिक्षण संस्थान में होते है लेकिन वहां बेहतर शिक्षा को लेकर छात्र आंदोलन होते है, न की तोड़फोड़ और हिंसात्मक आंदोलन !

Written by Ojas Nihale

एक लेखक अपनी कलम तभी उठाता हैं, जब उसकी संवेदनाओ पर चोट हुई हों !! पत्रकारिता में स्नातकोत्तर...
कभी सही कभी गलत, जैसा आपका नजरिया !

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