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उपमुख्यमंत्री बनने के 48 घंटे बाद ही अजित को मिली राहत, 70 हजार करोड़ के घोटाले में मिली क्लीन चिट

महाराष्ट्र में चल रहे राजनीतिक हंगामे के बीच एक ख़बर ये आ रही है कि एसीबी ने सिंचाई घोटाले (Irrigation scam) से जुड़े नौ केस बंद कर दिए हैं. सिंचाई घोटाले में अजित पवार भी आरोपी हैं जो फिलहाल फडणवीस की सरकार में उपमुख्यमंत्री बना दिए गए हैं. हालांकि एसीबी का कहना है कि जो नौ केस बंद किए गए हैं, उनका वास्ता अजित पवार (Ajit Pawar) से नहीं है. लेकिन इस घोटाले के कुछ मामलों का बंद होना भी अहमियत रखता है.

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महाराष्‍ट्र के भ्रष्‍टाचार निरोधक ब्‍यूरो (एसीबी) के सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी ANI ने कहा कि बंद किए गए 9 मामलों में से कोई भी मामला अजित पवार से नहीं जुड़ा है जिन्‍होंने शनिवार की सुबह बड़े ही नाटकीय घटनाक्रम में मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ उप मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली थी. ब्‍यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि यह एक रुटीन प्रक्रिया है.

वरिष्‍ठ अधिकारी परमबीर सिंह ने ANI से कहा, ‘सिंचाई से जुड़ी शिकायतों के मामले में करीब 3000 टेंडरों की जांच हम कर रहे हैं. ये नियमित जांच है जो बंद हुई हैं और बाकी मामलों में जांच पहले की तरह ही जारी है.’ उन्‍होंने कहा कि आज जिन मामलों को बंद किया गया है उनमें से कोई भी अजित पवार से जुड़े नहीं हैं.

हालांकि इन मामलों के बंद किए जाने के समय ने विवाद खड़ा कर दिया है क्‍योंकि बीजेपी ने शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी की कोशिशों पर पानी फेरकर अजित पवार के साथ मिलकर राज्‍य में सरकार बना ली. अजित पवार ने दावा किया है कि एनसीपी के 54 विधायक उनके साथ हैं जबकि उनके इस दावे का उनके चाचा व पार्टी प्रमुख शरद पवार खंडन कर रहे हैं.

देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी सिंचाई घोटाले को लेकर हमेशा अजित पवार पर निशाना साधते रहे हैं. 2014 में मुख्‍यमंत्री बनने के बाद जो पहली कार्रवाई उन्‍होंने की थी वो थी सिंचाई घोटाले में अजित पवार की कथित भूमिका की जांच के आदेश देना. आरोपों में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार के वक्‍त जब अजित पवार उप मुख्‍यमंत्री थे तब करीब 70000 करोड़ रुपये के हेराफेरी के भी आरोप हैं.

सिंचाई घोटाले में महाराष्‍ट्र में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार के दौरान कई सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी देने और उनके क्रियान्‍वयन में अनियमितताएं शामिल हैं.

पिछले महीने महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, शरद पवार और अजित पवार दोनों पर प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन का आरोप लगाया था जो एक कोऑपरेटिव बैंक से जुड़ा था.

Written by Ojas Nihale

एक लेखक अपनी कलम तभी उठाता हैं, जब उसकी संवेदनाओ पर चोट हुई हों !! पत्रकारिता में स्नातकोत्तर...
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