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शर्मनाक/ जिसका लोहा पूरी दुनिया ने माना उस महान गणितज्ञ वशिष्ठ बाबू को एम्बुलेंस तक नसीब नहीं हुई

दुनिया के महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन पीएमसीएच पहुंचने से पहले ही हो चुका था। उनके मृत शरीर को घर ले जाने के लिए अस्पताल प्रशासन शव वाहन तक उपलब्ध नहीं करा सका। डीएम कुमार रवि ने जब सिविल सर्जन को आदेश दिया तब जाकर थोड़ा इंतजार करने के बाद एंबुलेंस पहुंची। उसी एंबुलेंस से उनके पार्थिव शरीर को उनके घर कुल्हड़िया कॉम्प्लेक्स पहुंचाया गया।

वशिष्ठ नारायण सिंह के लिए पीएमसीएच शव वाहन तक नहीं करा सका उपलब्ध

हालत गंभीर होने पर नौ बजे के करीब इमरजेंसी में उन्हें ले जाया गया। इमरजेंसी के मेडिसिन विभाग में उनकी ईसीजी की गई। जांच के बाद पता चला कि उनकी मौत रास्ते में ही हो गई थी, जैसा कि पीएमसीएच के डॉक्टरों ने बताया। अस्पताल प्रशासन ने मृत्यु प्रमाण पत्र भी दिया। करीब साढ़े नौ बजे तक सभी प्रक्रियाएं पूरी कर पार्थिव शरीर राजेन्द्र सर्जिकल ब्लॉक के पास खुले में ही करीब आधे घंटे तक पड़ा रहा।

एक तरफ सूबे का मुखिया बिहार की इस बड़ी विभूति को श्रद्धांजलि दे रहा था और दूसरी तरफ अस्पताल प्रशासन में ये संवेदनशीलता भी नहीं थी कि वो शख्सियत जिस पर बिहार की कम से कम छह पीढ़ियां गर्व करती रही हैं, जिनकी प्रतिभा का लोहा देश और दुनिया ने माना, उस महान विभूति को उसकी अंतिम यात्रा में गरिमामय ढंग से बिना विघ्न विदा करे.

आइंस्टीन के सिद्धांत को दी थी चुनौती

गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह ने महान वैज्ञानिक आइंस्टीन के रिलेटिविटी के सिद्धांत को चुनौती दी थी. उनका एक मशहूर किस्सा है कि नासा में अपोलो की लांचिंग से पहले जब 31 कंप्यूटर कुछ समय के लिए बंद हो गए, तो नारायण ने उस बीच कैलकुलेशन किया और कंप्यूटर ठीक होने पर उनका और कंप्यूटर्स का कैलकुलेशन एक जैसा ही था.

1969 में कैलिफोर्निया से PHD

गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह ने 1969 में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री हासिल की. जिसके बाद वह वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर बन गए. वशिष्ठ नारायण ने नासा में भी काम किया, लेकिन वह 1971 में भारत लौट आए.

भारत लौटने के बाद वशिष्ठ नारायण ने आईआईटी कानपुर, आईआईटी बंबई और आईएसआई कोलकाता में नौकरी की. 1973 में उनकी शादी हो गई. शादी के कुछ समय बाद वह मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया से पीड़ित हो गए. इस बीमारी से ग्रसित होने के बाद उनकी पत्नी ने उनसे तलाक ले लिया.

जांच समिति का हुआ गठन

परिजनों ने शव वाहन या एंबुलेंस समय पर नहीं मिलने का जो आरोप लगाया है, उसकी जांच के लिए अधीक्षक ने जांच समिति का गठन किया है। अधीक्षक राजीव रंजन प्रसाद ने बताया कि परिजनों के आरोप की तीन सदस्यीय समिति जांच करेगी। पटना मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विद्यापति चौधरी की अध्यक्षता में उपाधीक्षक डॉ. अहमद अंसारी और इमरजेंसी के मुख्य आकस्मिक चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अभिजीत सिंह अन्य सदस्य होंगे।

Written by Ojas Nihale

एक लेखक अपनी कलम तभी उठाता हैं, जब उसकी संवेदनाओ पर चोट हुई हों !! पत्रकारिता में स्नातकोत्तर...
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