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वामपंथी मिडिया: प्रोपोगेंडा आधारित पत्रकारिता, प्रपंच फैलाना जिसका एकमात्र उद्देश्य

भारत की मिडिया एक लगातार समय तक वामपंथ की गोदी में रहा है जिन्हे सिर्फ एक मजहब का दर्द दिखता है और सुनाई देता है और केवल मात्र उनके प्रति सहानुभूति प्रकृट करते है.हालाँकि अब वामपंथियों का मिडिया पर पूर्णतया एकाधिकार नहीं रह गया है, जैसा की पहले था इसलिए अब हमे वो चीजे और वो बाते भी सुनाई और दिखाई देती है जो वामपंथी मिडिया ने न तो कभी बताई और न आज सिकुड़ता हुआ वामपंथी मिडिया बताता है !

एक लम्बे समय तक इस देश के संचार साधनो पर कब्जा लेकर बैठे हुई वामपंथियों ने हमेशा एक विशेष वर्ग को किसी भी कारण-अकारण में दोषी ठहराया है, उनके लिए ये सब मजहब देखकर बाहर निकलता है.

अगर वामपंथी अपनी कलम नहीं बेचते और पत्रकारिता के सही पैमाने पर खरे उतरते तो आज सेकड़ो लोगो को कलम उठाने की आवश्यकत नहीं पड़ती और ना ही मिडिया के आगे पीछे मेनस्ट्रीम या सोशल मिडिया जैसे शब्द या उसके मायने प्रचारित होते !

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वामपंथी मिडिया ने हमेशा से एक वर्ग को दोषी की तरह और एक वर्ग को शांतिदूत की तरह प्रोपोगेंडा की तरह फैलाया. अपराध के इनके मायने इतने रह गए थे की एक वर्ग अत्याचार करता है और एक वर्ग सहता है, बहुसंख्यक अल्पसंख्यक पर अत्याचार करता है इनका ये प्रोपोगेंडा का मानक तय रहता है !

हालाँकि ये जगजाहिर है की वामपंथीयो के हाथ और ये विचारधारा हिंसा की पुरजोर समर्थक रही है,जिनके हाथ खून से रंगे है, वामपंथ हिसा में विश्वास करता हैं। आप भारत में अगर वामपंथी हिसा को देखे तो अभी तक हज़ारों लोगो को अपने काम से हाथ धोना पड़ा हैं। वामपंथ का ये मानना हैं कि अगर क्रांति लानी हैं तो समाज के 5 -10 % लोगो को हटाना पड़ेगा। रूस और चीन की क्रांति में भी कई करोड़ लोग मरे गए। कंबोडिया, वियतनाम इत्यादि जगहों पर भी बहुत सारे लीग मारे गए। स्टालिन और माओ के भी हाथ खून से रंगे हुए हैं। वामपंथ में आलोचना को अच्छा नहीं माना जाता है। पार्टी ही सर्वे सर्वा होती हैं।

अगर आप समय के अनुसार नहीं ढालेंगे तो आप इतिहास बन जाएंगे।

एक समय तक पत्रकारिता को समिति कर देने वाली वामपंथी मिडिया कुछ साल पहले अचानक से सक्रिय हो जाती है, क्योकि इनके मुद्दे व्यक्ति और उसके कपड़े हो जाते है उनके मुद्दे हो जाते है की मोदी ने बीए कब किया, मोदी एनडीटीवी को इंटरव्यू क्यों नहीं देते, मोदी मशरूम खाते है वगैरह वगैरह
जब वामपंथी मिडिया को लगा की अब दक्षिणपंथी सत्ता के साथ ही दक्षिणपंथी मिडिया का भी कही उदय न हो जाये तो इस वामपंथन मिडिया ने मोदी को केंद्र में रखकर गड़े मुर्दे उखाड़ना शुरू कर दिए की इस आदमी की छवि को बिगाड़ना है जो वामपंथी मिडिया के संस्कारों में रहा है !

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हा सरकारे किन्ही मानकों पर खरा नहीं उतरती और हर हर योजना आशाओं के अनुरूप साबित नहीं हो पाती.लेकिन ये वामपंथी मिडिया को दशकों तक नहीं दिखा जो अब दिखा रहा है ! सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाने की बजाय ये एक व्यक्ति पर निजी आक्षेप लगाने लगे और जो मुद्दे थे ही नहीं उन्हें राष्ट्रीय मुद्दा बनाने की होड़ करने लगे जैसे मोदी ने क्या खाया, कितने के कपडे पहने, अपनी पत्नी को क्यों छोड़ा ? आदि
अब पतित होती वामपंथी मिडिया को लोकतंत्र खतरे में लग रहा है वो भी उन लोगो से जो लोकतान्त्रिक तरीके से जनाधार के साथ चुन कर आये है !

असल में इनकी समस्या ये नहीं है इनकी समस्या यह है की इन्हे आरोप लगाने के मुद्दे पिछले 6 वर्षो में नहीं मिले क्योकि इन वर्षो में न तो कोई घोटाला हुआ न किसी मंत्री का घोटालो में नाम आया ! मोदी सरकार ने यह साबित किया की उनका लक्ष्य न तो देश को तबाह करना है न ही राष्ट्र के नाम पर पार्टी को मजबूत करना है, वामपंथी चिरकुट लेख लिखते रहे है हर योजना को हर निति को बेकार कहकर नकारते रहे लेकिन लोगो में मोदी का भरोसा जगता गया और यही भरोसा वामपंथी मिडिया खोती गयी !

असल में वामपंथी मिडिया ने पत्रकारिता को छोड़कर दोगलई की है तुम्हारे मात्र लिखने भर से यह साबित नहीं हो जाता की तबरेज को जय श्री राम न बोलने पर मार दिया गया, तुम पुलिस केस बनने से पहले अपराधी तलाश लेते हो, फिर उसमे धर्म घुसा देते हो,फिर उसमे एक नारा और फिर कही दूर से भाजपा या संघ से सम्बन्ध रखने वाला व्यक्ति और फिर उसे नाम देते हो ‘ग्राउंड रिपोर्टिंग’.

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अब ऐसा नहीं होगा, पत्रकारिता तथ्यों से होगी प्रपंचो से नहीं,तुम हजारो ऐसी फर्जी खबर ढूंढ लाओ की जय श्री राम न बोलने पर भीड़ ने मार दिया लेकिन हम तथ्यों को लाकर तुम्हारी फ़र्जी और झूठु खबरों का पर्दाफाश करेंगे ! कठुआ काण्ड तो एक-दो होते है लेकिन मदरसों-मस्जिदों में ऐसे कितने काण्ड होते है वो तारीखों के साथ बताएंगे !
तुम्हारी हेडलाइन से पता चल जाता है की तुमने हिन्दुओ को निचा दिखाने के उद्देश्य से जबरजस्ती का एंगल कहा डाले हो लेकिन हम फिर फेक्ट चेक के साथ तुम्हारी नग्नता का दस मिनट में पर्दाफाश करेंगे !
क्योकि अब सही मानकों में और पत्रकारिता के सही उद्देश्य के साथ पत्रकारिता होगी, जिसमे नेरेटिव का कोई स्थान नहीं होगा !

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Written by Ojas Nihale

एक लेखक अपनी कलम तभी उठाता हैं, जब उसकी संवेदनाओ पर चोट हुई हों !! पत्रकारिता में स्नातकोत्तर...
कभी सही कभी गलत, जैसा आपका नजरिया !

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