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”ये कैसी तंगी ? हमारे पास पैसे नहीं है” कहने वाली कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में 820 करोड़ खर्च कर डाले

केंद्र की सत्ता से दूर कांग्रेस फंड की कमी का सामना कर रही है। ये बाते कांग्रेस नेताओं ने भी कई बार स्वीकारा और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट से भी इस तरह की बातों को बल मिला। लेकिन वर्तमान में जो तथ सामने आ रहे हैं उससे कांग्रेस के फंड की कमी वाली थ्योरी सोचने पर मजबूर कर देगी। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस ने 2019 के लोकसभा चुनाव और अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडीशा और सिक्किम के विधानसभा चुनावों में प्रचार अभियान के लिए 820 करोड़ रुपये खर्च किए थे।

यह आंकड़ा 2014 में पार्टी द्वारा आम चुनाव के दौरान खर्च किए गए 516 करोड़ रु से कहीं ज्यादा है। गौर करने वाली बात है कि कांग्रेस ने चुनाव प्रचार में खर्च करने की राशी में पिछले पांच सालों में 59 प्रतिशत की बढोत्तरी हुई है। वहीं बीजेपी की बात करें तो 2014 के आम चुनाव में उसने 714 करोड़ रूपए खर्च किए। खबर के अनुसार कांग्रेस ने 31 अक्टूबर को चुनाव आयोग को जो ब्यौरा सौंपा है उसके कांग्रेस ने पब्लिसिटी पर 626 करोड़ और उम्मीदवारों पर 194 करोड खर्च किए हैं। 

ऐसे में जब हमेशा सत्ता से दूर रहने की वजह से कांग्रेस के वित्तीय संकट से जूझने की खबरे आती रहती थी। और तो और कांग्रेस की तत्कालीन सोशल मीडिया प्रमुख दिव्या स्पदंना ने कहा था कि कांग्रेस आर्थिक तंगी से जूझ रही है। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए ट्वीट किया था कि मुझे नहीं लगता कि हमें यह स्वीकार में हिचकना चाहिए कि कांग्रेस वित्तीय संकट से जूझ रही है। हमें देश के सभी नागरिकों से आह्वान करना चाहिए कि बीजेपी के धन की पोटली से मुकाबले में हमारी मदद करें। ऐसे में तंगी के बाहजूद चुनावी खर्च में पांच गुणा का इजाफा इस थ्योरी को सिरे से खारिज कर रही है। 

बाकी पार्ट‍ियों की बात करें तो लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 83.6 करोड़ रुपये लगाए. बहुजन समाज पार्टी ने 55.4 करोड़ रुपये लगाए, NCP ने 72.3 करोड़ रुपये तथा 73.1 लाख रुपये खर्च किए.

Written by Ojas Nihale

एक लेखक अपनी कलम तभी उठाता हैं, जब उसकी संवेदनाओ पर चोट हुई हों !! पत्रकारिता में स्नातकोत्तर...
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