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कुणाल कामरा और सस्ती लोकप्रियता, क्योकि मोदी के अलावा तो कुछ है ही नहीं !

सस्ती लोकप्रियता हासिल करने और विरोध करने के लिए अब केवल एक ही नाम रह गया हे वो है मोदी मोदी करना और मोदी को गाली देकर अपनी दुकान चलाना, पद की गरिमा और संविधान बचाने की बात करने वाले जब सस्ती कॉमेडी के जरिये किसी प्रतिष्ठित व संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते है तब इन्हे पद की गरिमा का ख्याल नहीं आता !
क्योकि शायद इन्हे भी यही लगता है की मोदी इतने लोकप्रिय है तो इनके विरोध के नाम ही सही दुकान तो चलेगी !
हालाँकि ऐसा भी नहीं की किसी की या सरकार की आलोचना करना गलत है लेकिन सस्ती कॉमेडी में दस लोगो के सामने माँ बहन जैसी गालियों में कॉमेडी करना कॉमेडी नहीं आपकी तुच्छ मानसिकता को दर्शाता है
हर बार एक ही व्यक्ति के इर्द गिर्द घूमती आपकी कॉमेडी यह जाहिर करती है की अब आप के पास कुछ करने को बचा नहीं है !

अब तो सस्ते स्टेंड अप कॉमेडियन भी मोदी मोदी करके दस लोगो की भीड़ को पैसे लेकर हंसा लेते है!
अब कुणाल कामरा को ही ले लो महोदय अपनी कॉमेडी की शुरुआत ही अश्लील भाषा से करते है और अंत भी और मोदी तो है ही !
दरअसल ऐसा नहीं है की इनके अलावा कोई कॉमेडियन नहीं है लेकिन शायद इन्हे यह नहीं पता की इनसे बड़े बड़े कॉमेडियन इस देश में है जो राजनैतिक नेताओ पर आक्षेप भी करते है और व्यंग्य भी कसते और कटाक्ष भी करते है लेकिन वो इस प्रकार से गालियों की बौछार रूपी माँ-बहन वाली कॉमेडी नहीं करते ! क्योकि उन्हें जरुरत नहीं है !

किसी बड़े मंच पर दस लोगो के बिच चले जाइये और हँसाने के लिए कुछ भी तथ्यरहित आंकड़ो के साथ वल्गर भाषा मिलाकर कॉमेडी कर दीजिये,क्योकि जमीन पर तो जाकर आप देखे नहीं की कितने शौचालय बन गए है !
शहर भले ही जैसे थे वैसे हो शहरो को ज्यादा जरुरत नहीं थी विकास की लेकिन उन गाँवों में जाकर देखो जहा जरुरत थी विकास की और दिखता भी लेकिन आपको नहीं दिखता वो एक अलग बात है ! क्योकि आप कभी शहरों के स्टेज छोड़कर गाँवों में गए ही नहीं, एसी कमरों में बैठकर ट्विटर पर मखौल उड़ाने के अलावा आपने तथ्यों को देखा ही नहीं उन्हें परखा ही नहीं !

दरअसल इन लोगो की असल समस्या मोदी नहीं है बल्कि मोदी के अलावा कोई है ही नहीं इनके पास कुछ करने या कुछ बोलने के लिए !

इनकी नजर में या क्षुब्ध हो चुकी मानसिकता में मोदी सरकार द्वारा किया हर काम गलत ही होता है फिर भले ही इन्होने भी चुपके से किसी योजना का फायदा उठाया हो. हा, सरकार कोई भी हो या तो कोई काम रुक जाते है या देर हो जाती है लेकिन हर किया काम गलत हो यह तो आपकी व्यक्तिविरोधी मानसिकता को बताता है. अगर मानसिकता सही हो या सकारात्मकता के लिए दिमाग में जगह छोड़ी हो तो अच्छे काम भी अवश्य दिखेंगे ! लेकिन आपके दिमाग पर हावी नकारात्मकता ने आपके दिमाग को खोखलेपन से खाली कर दिया है जिसे कोई अच्छा या सकारात्मक सूझता ही नहीं !

अंत में
गलत में विरोध में रहो हम भी है, लेकिन सही के साथ भी वैसे ही रहो और न रह सको तो shut up yaa bro !!

Written by Ojas Nihale

एक लेखक अपनी कलम तभी उठाता हैं, जब उसकी संवेदनाओ पर चोट हुई हों !! पत्रकारिता में स्नातकोत्तर...
कभी सही कभी गलत, जैसा आपका नजरिया !

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