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सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में दिया हलफनामा, निर्णायक दौर में वापस लेना चाहता है केस

नई दिल्ली. दशकों से चले आ रहे राम जन्‍मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद (Ram janam bhumi-babri masjid) में नया मोड़ आ गया है. उत्‍तर प्रदेश सुन्‍नी सेंट्रल वक्‍फ बोर्ड (UP Sunni Central Waqf Board) ने इस मामले में दायर केस को वापस लेने का फैसला किया है. वक्‍फ बोर्ड ने मध्‍यस्‍थता पैनल के जरिये इस बाबत सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में हलफनामा (Affidavit) दाखिल किया है. बताया जा रहा है कि सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड ने हलफनामा दाखिल करने से पहले अपने वकीलों से सलाह-मश‌विरा भी नहीं किया. हलफनामे में सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह अपना केस वापस लेना चाहता है. हलफनामा श्रीराम पंचू की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया है.

वक्‍फ बोर्ड के वकील बोले- मुझे जानकारी नहीं

उत्‍तर प्रदेश सुन्‍नी सेंट्रल वक्‍फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने केस वापस लेने के बोर्ड के फैसले की जानकरी से अनभिज्ञता जाहिर की है. उन्‍होंने बताया कि उन्‍हें वक्‍फ बोर्ड ने केस वापस लेने की सूचना नहीं दी है. अयोध्‍या में रामजन्‍मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में आठ मुस्लिम पक्षकारों ने केस दायर किए हैं. मुख्‍य पक्षकार सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड की ओर से दो केस दायर किए गए हैं.

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इकबाल अंसारी बोले- मुझे कोई आपत्ति नहीं

रामजन्‍मभूमि विवाद मामले में एक और पक्षकार इकबाल अंसारी ने सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड के फैसले पर प्रतिक्रिया दी है. उन्‍होंने कहा कि बोर्ड के निर्णय से उन्‍हें कोई आपत्ति नहीं है. उन्‍होंने एक बार फिर से दोहराया कि उन्‍हें सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्‍वीकार्य होगा. वहीं, इकबाल अंसारी के वकील वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता एमआर शमशाद ने बताया कि पिछले दो महीनों में सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड के रवैये में आमूलचूल परिवर्तन आया था. उन्‍होंने बताया कि इस मामले में कुल छह मुस्लिम पक्षकार हैं, जिनमें से सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड भी एक था.

इस स्‍टेज पर केस वापस लेना संभव नहीं’

इकबाल अंसारी के वकील शमशाद का कहना है कि अयोध्‍या विवाद मामले की सुनावाई निर्णायक दौर में है, ऐसे में किसी भी पक्ष द्वारा संबंधित समुदाय को नोटिस दिए बगैर इस स्‍टेज पर केस वापस नहीं लिया जा सकता है. हालांकि, उन्‍होंने स्‍पष्‍ट किया कि सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड द्वारा केस वापस लेने की स्थिति में भी इस मामले पर कोई ज्‍यादा फर्क नहीं पड़ने वाला है, क्‍योंकि मामले के अन्‍य पक्षकार कानूनी प्रक्रिया का हिस्‍सा बने रहेंगे.

मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी दी प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्‍या मामले पर आज आखिरी दिन की सुनवाई होनी है. इससे पहले मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी अपनी राय व्‍यक्‍त की है. मुफ्ती मन्‍ना मालिनी ने कहा कि अब कोर्ट को फैसला करना है. हम फैसले का इंतजार कर रहे हैं. मुकदमा हक-ए-मिल्कियत (जमीन पर अधिकार) का है. हमें भरोसा है कि मुकदमा हमारे हक में है. उन्‍होंने उम्‍मीद जताई है कि जैसे प्रशासन ने वीएचपी को दीप प्रज्‍ज्‍वलित करने से मना कर दिया, वैसे ही कोर्ट भी उन्‍हें अनुमति नहीं देगा. वहीं, मुफ्ती दानिश जरूरी ने कहा कि उन्‍हें सुप्रीम कोर्ट पर यकीन है कि जो भी फैसला आएगा वो ईमानदारी से आएगा. कारी सलीम रजा का कहना है कि राजनीति से अलग फैसला आना चाहिए. जिस तरह का भी फैसला होगा उसे माना जाएगा.

इससे पहले मंगलवार को ही मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने साफ़ कर दिया था कि मामले की अंतिम सुनवाई बुधवार (अक्टूबर 16, 2019) को होगी और उसके बाद अदालत फ़ैसला लिखने के लिए कुछ समय लेगी। भाजपा भी क़ानूनी तरीके से राम मंदिर बनवाने की बात अपने हर घोषणा-पत्र में शामिल करती रही है। अपुष्ट सूचनाओं का कहना है कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड अयोध्या में 2.77 एकड़ ज़मीन पर अपने मालिकाना हक़ का दावा छोड़ देगा और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में आज ही हलफनामा दायर किया जाएगा।

इससे पहले भी कई बार राम मंदिर पर मध्यस्थता की प्रक्रिया अपनाई गई लेकिन बात नहीं बनी। अंत में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की नियमित सुनवाई शुरू की और कहा जा रहा है कि नवम्बर में सीजेआई रंजन गोगोई के रिटायरमेंट से पहले इस मामले में फैसला आ सकता है।

Written by Ojas Nihale

एक लेखक अपनी कलम तभी उठाता हैं, जब उसकी संवेदनाओ पर चोट हुई हों !! पत्रकारिता में स्नातकोत्तर...
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