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लाल बहादुर शास्त्री – जिनके आदेश पर भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घुसकर मचाई थी तबाही

उत्तरप्रदेश के मुगलसराय में 1904 में जन्मे लाल बहादुर शास्त्री महज सोलह वर्ष की आयु में आजादी के आंदोलन में कूद पड़े थे.
लाल बहादुर शास्त्री का जन्म हर उस निजवान के लिए प्रेरणा का प्रतिक है जो अभावो में जी रहा है,कैसे उन्होंने गरीबी और अभावो के बीच पढ़ाई पुरी की और देश के प्रधानमंत्री पद तक का सफर तय किया.
आजाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन भी 2 अक्टूबर को मनाया जाता है,लेकिन यह विडंबना है की स्वतंत्रता सेनानी,देश के पूर्व प्रधानमंत्री और जो आम जनता को ही मुखिया मैंने वाले,जय जवान-जय किसान के उद्घोषक ऐसे महापुरुष को महज एक-दो कालम में आज कुछेक मीडिया संस्थानों ने समेट दिया.

हम खुद के के लिए ही नही बल्कि पूरे विश्व की शांति, विकास और कल्याण में विश्वास रखते हैं : लाल बहादुर शास्त्री

जानिए उनके जीवन से जुड़े कुछ तथ्य की कैसे छोटे कद के शास्त्री के पैरो में झुक गया था पाकिस्तान –

1965 में पाकिस्तान ने चुपचाप युद्ध का ऐलान कर दिया.और आपरेशन जेब्रालटर झेड दिया.और भारतीय सेना की कम्युनिकेशन लाइन को नष्ट करने हजारो सैनिक कश्मीर भेज दिए थे.तब तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने भारतीय सेना को पाकिस्तान में घुसने का आदेश दिया और भारतीय सेना ने पाक की नापाक हरकतों का मुँह तोड़ जवाब उनके ही घर में घुसकर दिया .

जय जवान जय किसान

1964 में प्रधानमंत्री बनने के अगले ही साल 1965 में भारत पाकिस्तान युद्ध छिड़ गया.देश में भयंकर सूखा भी पद गया.वित्तीय संकट को टालने के लिए उन्होंने देशवासियो से एक दिन उपवास रखने की अपील की,शास्त्री जी की छवि ऐसी थी की उनकी अपील का समस्त देशवासियो ने मान रखा.तब उन्होंने कृषि की आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए नारा दिया ”जय जवान जय किसान” !

कानून का सम्मान किया जाना चाहिए ताकि हमारे लोकतंत्र की बुनियादी संरचना बरक़रार रहे और हमारा लोकतंत्र भी मजबूत बने : लाल बहादुर शास्त्री

मिलो नंगे पैर चलते थे पढ़ाई के लिए

2 अक्टूबर 1904 को जन्मे शास्त्री जब महज 8 माह के थे तभी उनके पियाजी शारदा प्रसाद का निधन हो गया था.उसके बाद उनकी माँ रामदुलारु देवी ने ही उनका पालन पोषण किया.लाल बहादुरी शास्त्री का पढ़ाई के प्रति इतना अदम्य सहस था की वह मिलो दूर नंगे पैर ही स्कुल जाते थे.

देश की तरक्की के लिए हमे आपस में लड़ने के बजाये गरीबी, बीमारी और अज्ञानता से लड़ना होगा : लाल बहादुर शास्त्री

आम जनता ही मुखिया

लाल बहादुर शास्त्री की राजनितिक राय हमेशा आम जनमानस के लिए ही रहती थी,एक बार उन्होंने कहा था – जो शासन करते हे उन्हें एक बार देखना चाहिए की लोग प्रशसन पर किस तरह प्रतिक्रिया करते है.आम जनता ही मुखिया होती है.

हमारी ताकत और मजबूती के लिए सबसे जरूरी काम है लोगो में एकता स्थापित करना : लाल बहादुर शास्त्री

सफेद व हरित क्रांति किए जनक

लाल बहादुर शास्त्री को जितना जवान पसंद थे,उतना ही किसान भी पसंद थे,इसलिए ही उन्होंने नारा दिया था जय जवान जय किसान.हरित क्रांति व सफेद क्रांति के अग्रदूत भी लाल बहादुर शास्त्री ही थे.उन्होंने अपने आवास के लॉन में ही खेती शुरू कर दी थी.

1965 पाक युद्ध के दौरान लाल बहादुर शास्त्री ने भारतीय सेना को खुली छूट दी थी.जिसका नतीजा यह हुआ था की भारत ने 1900 वर्ग किमी का पाकिस्तानी इलाका जीता था.

Written by Ojas Nihale

एक लेखक अपनी कलम तभी उठाता हैं, जब उसकी संवेदनाओ पर चोट हुई हों !! पत्रकारिता में स्नातकोत्तर...
कभी सही कभी गलत, जैसा आपका नजरिया !

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