in

जेहादियों कि आंटी अरुंधति रॉय का पूरा कच्चा चिट्ठा- जानिए इनकी पूरी कहानी

कुछ लोग महज फ़ोरी प्रसिद्धि के लिए कितने निचले स्तर तक गिर जाते है कि वह अपने ही देश व सेना पर टिप्पणी करने से भी नहीं झिझकते इसके कई उदाहरण आपने पिछले 4 -5 वर्षो में देखे होंगे ! 

हम बात कर रहे है लेखिका अरुंधति रॉय की जो सेना व देश विरोधी बयानों के जरिये किसी न किसी तरह चर्चा में बनी रहने के लिए सदैव प्रयासरत रहती है ! आप सरकार विरोधी है इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन आपकी कलम देश को तोड़ने वाली शक्तियों के लिए ही क्यों चलती है ? कभी वह छत्तीसगढ़ के आदिवासियों का खून बहाने वाले माओवादियों के साथ खड़ी हो जाती हैं. तो कभी उन्हें कश्मीर के अलगाववादी नेताओं के समर्थन में लिखने में भी लज्जा नहीं आती. अरुंधति राय कश्मीर की आज़ादी की पैरोकार हैं.हा हम जानते हे की आपको इसमें लज्जा नहीं आती आपको लज्जा आती हे उन सैनिको के लिए लिखने में जो प्राकृतिक आपदा में या सीमा पर हर जगह भारतीयों की सुरक्षा के लिए तैनात रहती हैआपको लज्जा आती हे उन 200  बेकसूर लोगो के लिए लिखने में जो 2008 के मुंबई हमले में पाकिस्तानी आतंकवादियों के हाथों मारे गए थे !आपकी कलम गोधरा कांड में मारे गए मासूमो पर थम जाती हे क्यों ?

अलगाववादी नेता यासीन मालिक के साथ आप  हाथ में हाथ डालकर फोटो खिचवाती है  क्यों आपने मुंबई हमलों के अगुवा हाफ़िज़ सईद पर एक निंबंध भी लिखने की जुर्रत नहीं की ?आप कैसे लिख सकती हो इन अलगाववादी व् आतंकवादी के बारे में नहीं आप नहीं लिख सकती क्योंकि आपने तो मानो जैसे देश विरोध का ठेका ले लिया हो…!

अलगाववादी नेता यासीन मलिक के साथ लेखिका अरुंधति रॉय

अरुंधति राय का नजरिया पूरी तरह से न सिर्फ सरकार विरोधी है बल्कि भारत विरोधी भी है.और उन्होंने इसे अपने देश विरोधी बयानों से जाहिर भी किया हैमैं मानता हूं कि सरकार की नीतियों का विरोध देश के हरेक नागरिक का लोकताँत्रिक अधिकार है. इसमें कोई बुराई नहीं है कि आप सरकार की किसी नीति से सहमत या असहमत हों. लेकिन माओवादियों व अलगावादियों के खेमे में जाकर बैठी इस मोहतरमा को बेनकाब किया जाना आवश्यक है. इतना ही नहीं सबसे दुखद और चिंताजनक पक्ष तो ये भी है कि अरुंधति राय देश-विरोधी तत्वों के लोगो के लेख-बयानों को सोशल मीडिया पर शेयर करके अपने कर्तव्य का बखूबी निर्वहन भी करती हे जेसे इन्हें ये सब करने में बड़ा आनंद आता है.

इनका कहना की आरएसएस हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहती हे जिसका में विरोध करती हुं,बेशक कीजिये विरोध यह आपका संवैधानिक अधिकार हे लेकिन मोहतरमा उनका भी तो विरोध कीजिये जो  अलग मुस्लिम राष्ट्र कश्मीर की मांग करते हे जो देश के सबसे बड़े मंदिर संसद पर हमले का दोषी आतंकवादी अफजल गुरु को अपना आदर्श मानते हे,लेकिन नहीं आप उन अलगाववादियों का विरोध भला क्यों करोगी क्योंकि आप तो उनके पक्ष में खड़े मिलती हो ?आखिर आपकी कलम आतंकवाद माओवाद नक्सलवाद पर थम सी क्यों जाती है ?कुछ पुरस्कार क्या मिले ,आपने तो जैसे यह मान लिया हो की आपको देश के खिलाफ बोलने का लाइसेंस मिल गया हो सरकार की आलोचना कीजिये लेकिन सेना व देश विरोधी बयान देना ”भारत तेरे टुकड़े होंगे” जैसे देश-विरोधी नारे लगाने वालो के साथ खड़े होना क्या दर्शाता हे ?यही की विस्तृत अंग्रेजी की लेखिका को चंद पाठक तो चाहिए ?कुंठित व क्षुब्ध मानसिकता केवल झूठी प्रसिद्धि दिला सकती हे सच्ची नहीं !युवाओं को उन्मादी बनाने क़ा यह प्रोपोगेंडा मात्र हैआप विदेशी मंच पर जाइये फर्राटेदार अंग्रेजी में 2 4 शब्द फ़्रेंच डाल दीजिए औऱ अपनी बात में वजन बड़ा लीजिएबाकी जो आपके सामने चंद लोगों की भीड़ है वो आपसे क्रास सवाल तो करेगी ही नहीं

एक बात औऱ देश विरोधी नारे लगाने के बाद भी इन्हें अभिव्यक्ति कि आजादी चाहिए अभिव्यक्ति कि आज़ादी के नाम पर आप कुछ भी अनाज शनाप बोलिए, देश विरोधी ताक़तों के साथ खड़े हों जाते हों, हिंसा के समर्थन में बोलते हों, भारतीय सेना को अँग्रेज़ सेना से भी बदत्तर बताने के लिए कोई असर नहीं छोड़ी,लेकिन जब आपसे कोई यह पूछे कि देश विरोधी ताक़तों का समर्थन क्यों ?तब आपका तथाकथित लोकतंत्र फिर खतरे में आ जाताअगर अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर तुम जैसे माओवादियों-अलगाववाद-नक्सलवाद की हितैषी लेखक कुछ भी बोल सकती हैतो वही अभिव्यक्ति की आजादी आपसे सवाल करने वाले प्रत्येक भारतीय को हैजो न केवल अनुकूल बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी अपने देश, सेना व सरकार के साथ खड़े है !

अरुंधति के देश-विरोधी बयान –

  • भारत एक ऐसा देश है जहाँ की सेना अपने ही लोगो के खिलाफ है
  • पाकिस्तान ने भी इस तरह से सेना को अपने लोगो के खिलाफ नहीं लगाया 
  • भारत में अहिंसक विरोध प्रदर्शनों से बात नहीं बनती 
  • न्यायपालिका की अवमानना के आरोप में संक्षिप्त क़ैद काट चुकी अरुंधति का स्पष्ट कहना है कि वह हथियार उठाने वाले लोगों की निंदा नहीं करतीं।इसके अलावा अरुंधति कश्मीर की आज़ादी के पक्ष में अलगावादियों के साथ भी खड़ी नजर आती है वह कश्मीर की आज़ादी की पैरोकार रह चुकी है 
  • ऐसा लगता है जैसे यह अपरकास्ट हिन्दुओ का ही स्टेट हो ! 

दरअसल साल 2011 में अरुंधति  ने सेना पर जो टिपण्णी की थी उसका वीडियो सोशल मिडिया पर बीते दो दिनों से जमकर वायरल हो रहा है ! लगातार ट्रोल्स का शिकार हो रही अरुंधति ने अपने 11 साल पुराने वीडियो पर माफ़ी मांगी है ! माफ़ी मांगते हुए अरुंधति ने कहा है की – हम सभी जीवन के किसी पल में गलती से मूर्खतापूर्ण गलती कर देते है,वीडियो क्लिप से उपजे कन्फूजन के लिए में माफ़ी मांगती हु !!

Written by Ojas Nihale

एक लेखक अपनी कलम तभी उठाता हैं, जब उसकी संवेदनाओ पर चोट हुई हों !! पत्रकारिता में स्नातकोत्तर...
कभी सही कभी गलत, जैसा आपका नजरिया !

कश्मीर की आजादी मांगने वाले अब खुद मांग रहे आजादी,अलगाववादी नेता मीरवाइज सहित 5 अन्य ने भरा रिहाई का बांड

ह्यूस्टन हुआ मोदीमय, दुनिया ने देखा मोदी-ट्रम्प का याराना